आवाज़-ए-हिन्द

मेरे हिम्मत को सराहो मेरे हमराह चलो, मैंने एक दीप जलाया है हवाओं के खिलाफ.

29 Posts

410 comments

Abdul Rashid


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

विकास के नाम पर इतिहास बनते लोग !

Posted On: 22 Oct, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others social issues में

1 Comment

गरीब देश का आवाम नही,सिर्फ वोटर है।

Posted On: 16 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others social issues में

3 Comments

गरीब को सपना भी नसीब नहीं

Posted On: 29 Jun, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

4 Comments

सबसे बडी सजा नहीं है मृत्युदण्ड

Posted On: 6 Jan, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

10 Comments

समाजिक सरोकार और ब्लाग

Posted On: 12 Apr, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

30 Comments

अतिथि देवो भव:

Posted On: 9 Apr, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

32 Comments

एक क्रिकेट स्टार की खामोश विदाई

Posted On: 6 Apr, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

4 Comments

यही संदेश हमारा

Posted On: 2 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

32 Comments

आतंकवाद और इस्लाम

Posted On: 18 Dec, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

36 Comments

मकई का दाना

Posted On: 11 Dec, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.25 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

37 Comments

Page 1 of 3123»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आसानी से न्याय मिलने कि बात तो छोडिये, मूलभूत अधिकार भी आजादी के 66 साल बाद आम नागरिक के लिए कस्तूरी मृग बना हुआ है। कारण राजनैतिक माया जाल में फंसा आम नागरिक रोजी रोटी के लिए इतना उलझकर रह गया के उसे अपने अधिकार का बोध ही न रहा। सूचना पाने के अधिकार को कुचला जा रहा है। दो साल की सजा भुगत चुके लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलने की कोशिश की जा रही है। दान मे मिलने वाली रकम को राजनैतिक दल सार्वजनिक करने को तैयार नहीं और आरटीआई का अधिकार छीनने की तैयारी करने में लगे हैं । पारदर्शी एवं सशक्त जन लोकपाल न लाकर लोकतांत्रिक तानाशाही का दरवाजा खोल दिया गया है। जीविका के हर संसाधन पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है और मंहगाई के बोझ तले आम जनता दबी जा रही है, तो ऐसे हालात में स्वतंत्र है कौन? शीर्षक से ही पता चल जा रहा है श्री रशीद जी की सटीक पोस्ट लेकर आये हैं आप ! बहुत सही लिखा है

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

तो क्या अब आम नागरिक इस देश का आवाम नही , सिर्फ वोटर हैं। जिसका इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए राजनैतिक दल करते हैं। क्या यही पहचान बन कर रह जाएंगी आज़ाद भारत के नागरिकों की ? या वह दिन भी आएगा जब सत्ता आम नागरिक के लिए होगा, और तंत्र लोक के लिए काम करेगा? ऐसा समय आएगा,यकीनन आएगा लेकिन उसके लिए हमें जाति – धर्म, अल्पसंख्यक – बहुसंख्यक जैसी मनोरोग से उपर उठना होगा,और देशप्रेम की भावना का अलख जगाना होगा, तभी हम राजनैतिक कुचक्र को तोड़ पाएँगें और आने वाली पीढी को स्वतंत्रता का वास्तविक मतलब समझा पाएंगे। आदरणीय रशीद भाई, ईद मुबारक! स्वतंत्रता दिवस मुबारक! जागरूकता बढ़ी है, पर अभी और जगने की जरूरत है! सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय  अब्दुल जी सच  कहा आपने कि पढ़े लिखे लोग  भी यह सब कर रहे हैं। लेकिन  मित्र  यह केवल  हिन्दू धर्म  में ही नहीं हो रहा है, सभी धर्मों में हो रहा है। किन्तु हिन्दु धर्म  में तमाम  बुराईयाँ  होने के बाद  एक  बहुत  ही बड़ी अच्छाई है,  कि हम  उसकी आलोचना कर सकते हैं। जबकि इस्लाम  धर्म  जैसे कुछ  धर्मों में यह  एक  गुनाह  समझा जाता हैं। मेरा मानना है कि आलोचना का अधिकार न देना भी एक  गुनाह  ही है। मेरा मानना  है कि धर्म  हमारी एकता का सबसे बड़ा वाधक  तत्व है, धर्म  हमें उकसाता कि मंदिर  तोड़ों, मस्जिद  तोड़ो। धर्म  हमें दूसरे धर्म  की हिंसा करने के लिये उकसाता है, धर्म  केवल  अपने हित  देखता है। उसका राष्ट्रीय  हितों से कोई  सरोकार नहीं। प्रत्येक  शादी के रजिस्ट्रेशन  के विरोध  का आधार  धर्म, क्या आपको नहीं लगता यह  देश  की एकता और  विकास के लिये बहुत ही नुकसानदेह है। हम केवल  धर्म  और जाति का हित  देखते हैं, राष्ट्रहित नहीं। क्यों.......??????????? आदरणीय राशिद जी आपकी अगली पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं जा रही है इसलिये या लिखना पढ़ रहा है। इसके लिये क्षमा चाहता हूँ।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय राशिद जी, आपके आलेख  में एक  शब्द आया द्वंद युद्ध। मैं इसका अर्थ  हेगेल  के द्वंदवाद  के सिद्धांत  के परिपेक्ष  में लेना चाहूँगा। जिसके अनुसार प्रत्येक  विचार या सिद्धांत  की तीन  स्थितियाँ होती हैं। पक्ष, पतिपक्ष  तथा संपक्ष। सर्वप्रथम  कोई कोई व्यक्ति एक  विशेष  विचार या सिद्धांत  प्रस्तुत करता है इसके पश्चात  कोई अन्य व्यक्ति उस  विचार अथवा सिद्धांत का खंडन करके उसके विरोध  में सिद्धांत  प्रस्तुत  करता है। इन  दोनों को क्रमशः पक्ष  तथा प्रतिपक्ष  कहा जाता है। अंततः एक  अन्य  व्यक्ति उक्त  विरोधी सिद्धांत का समन्वय  करके एक  नवीन  सिद्धांत  प्रस्तुति करता है। जिसे संपक्ष कहा जाता है, यह संपक्ष  अपने पूर्ववर्ती पक्ष  तथा प्रतिपक्ष  दोंनो का समन्वित  रूप  होने के कारण  उसकी अपेक्षा अधिक  व्यापक  और संतुलित होता है। प्रत्येक  विचार की उपयोगिता इसीसे सिद्ध  होती है कि उनमें आंशिक  सत्य  अवश्य  विद्यमान  है और वह अधिक   व्यापक  और संतुलित  नवीन  विचार  की उत्पति  में सहायक  होता है।    यह  सिद्धांत  प्रचीन  काल  से लेकर आज  तक  चरितार्थ  है और शायद यह  नियम  ब्लॉग  पर भी  लागू होता है। आपका ब्लॉग  पढ़कर नवीन  विचारों से अवगत  हुआ   इसके लिये आपका आभार.. एवं सराहनीय  आलेख  के लिये बधाई.....

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

अबोध जी आपको भूल जाना नामुमकिन है. आपने तो पपीहे से पुछ लिया के सावन कि बूंद भूल गए हों क्योकि साल भर प्यासा रहकर सावन की एक बूंद ही उसकी प्यास बुझा सकता है. आपने तो मुझे उस वक्त सराहा है जब मुझे कोई जानता भी ना था. आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुमूल्य है. यह तो योगी जी का हठ था की मै दुबारा लौट आया जे जे पर. दरअसल काम की मसरुफीयत और जिंदगी के जद्दोजहद में कुछ इस तरह उलझ गाया हूँ की अपने दोस्तों के लिए दिल में चाहत होते हुए भी समय नही निकाल पा रहा था . योगी जी का हठ और एक आर्टीकल कि कुछ लाइन ने मुझे झंकझोर दिया लाइन कुछ ऐसी थी- मुहब्बत और दोस्ती में इतना फर्क है "मुहब्बत कहता है मै तेरे बिन जी नहीं सकता और दोस्त कहता है पगले मै तुझे मरने नही दुंगा" सो हम लौट आए अपने दोस्तों की महफिल में.

के द्वारा:

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Abdul Rashid Abdul Rashid

के द्वारा: Abdul Rashid Abdul Rashid

अब्दुल रशेदभाई नमस्कार धर्म की जब बात आती है तो बडे से बडा ज्ञानी भी चुप हो जाता है । ज्ञानी है ईस लिये सब जानता है, मानता है । वो मानता है सब धर्मों के किस्से कहानियां बाल कथा के अलावा कुछ नही । उस जमाने की अनपढ जंगली प्रजा का दिल बहल जाता था । ये कथाएं सच मान ली जाती थी । कथाओं को नीति नियमों में ढालकर बार बार सुनाया गया, धर्म ही बनाया गया । आदमी अभी २०० साल से ही जागा है । पेहले का हजारों साल का प्रजार, उस के प्रति भक्तिभाव आदमी की रूह में घुस गया है, आसान नही है उसे बदलना । और बदलें तो क्या बदले ये विकल्प भी नही है ज्ञानियो के पास । इस लिए ज्ञानी चुप है । धर्म तो चाहिए । दवा का खराब रिएक्शन आता है तो भी पीनी मजबूरी है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

आदरणीय रशीद भाई, आदाब ! आपने तो बहुत संक्षेप में यजीद की क्रूरता के बारे में लिखा है, मैंने "कर्बला" पुस्तक पढ़ी थी, जो नाटक के रूप में थी. आंसू गिर रहे थे, इतने मार्मिक प्रसंग थे उसमें. रात में दरिया के किनारे सैनिकों द्वारा घेरा जाना, महिलाओं का विलाप ! उफ़ !!! सचमुच कोई भी धर्म हिंसा का रास्ता नहीं बताता, और किसी भी धर्म को हिंसक नहीं कहा जा सकता. किसी भी धर्म के पीछे झाँक कर देखें..... प्रेम, भाईचारा, स्नेह और सहयोग की ही बातें मिलेंगी. रशीद भाई, मेरा तो इतना ही कहना है...... . "धर्म तो ठंडी हवा है, प्यार का अहसास है ! सब इसे महसूस करते, यह सभी के पास है ! एक सूरज "SUN'' कहें, अथवा पुकारें अफताब ! उसकी नज़रों में कोई भी आम है न ख़ास है !!!

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

के द्वारा: Amar Singh Amar Singh

के द्वारा: naturecure naturecure

के द्वारा:

प्रिय रशीद जी बहुत बहुत आभार आप का एक सपूत डॉ राजेन्द्र प्रसाद की कहानी आप ने यहाँ लोगों को दिखाया काश आज के हमारे नेता ये पढ़ें आज तो उन्हें मिल जाएँ तो हमारे और आप के वेतन का कुछ हिस्सा भी रखवा लें न जाने कितने का पेट काटकर दस देशों में अपनी जागीर बना कर रख रहे ताकि आने वाली उनकी हर पीढ़ी सोती रहे ///.. इनके और बहादुर शास्त्री से नेता की जरुरत है देश को ...नमन हैं इन्हें ...भ्रमर ५ उस समय संविधान के अनुसार उनका वेतन 10 हजार रुपया प्रतिमाह था,लेकिन उन्होनें कहा के मेरे लिए इस वेतन का चौथाई भाग अर्थात ढाई हजार रुपए ही पर्याप्त है, मैं केवल इतना ही स्वीकार्य करुंगा। 1962 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। त्याग और देशभक्ति

के द्वारा:

के द्वारा:

प्रिय अब्दुल रशीद भाई पहले तो लेख पढ़ते पढ़ते मन में आया की आप से शिकवा करून की जाते वक्त बताये होते तो हजरत और ख्वाजा से हमारे लिए भी कुछ दुवा ..लेकिन आगे पढ़ते पढ़ते मेरे मन को सुकून और मुराद पूरी होने पर ख़ुशी मिली आप ने सब के लिए हाजिरी लगायी और दुवा किया यही होती है इंसानियत और पहचान ..आप की परी बेटी के लिए बहुत बहुत शुभ कामनाएं -दर्शन भी हो गया .....भ्रमर ५ चादर पोशी कि और सजदा कर जब अपनी हाजरी के लिए दुआ मांगना शूरु किया तो शायद हि कोई हो जिसका ख्याल जेहन में न आया हो क्या रिस्तेदार क्या ब्लागर दोस्त सभी कि यादों को समेटद कर बेहतरी के साथ आमीन कहा। उसके बाद दो रक़ात नामज़े नफील अदा किया और चल पड़े, आंखे नम थी दरगाह से वापसी से तो दिल खुश था के वर्षों कि तमन्ना आज पुरी हो गई

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

प्रिय अब्दुल राशिद जी ....आदाब ! यह जान कर हर्ष हुआ और मन को सकूँ मिला की आपने न केवल अपने लिए बल्कि सभी के लिए ख्वाजा जी के दरबार से दुआ मांगी है ...... मैं भी ख्वाजा जी के पावन दरबार पर अपना शीश निवाने का सोभाग्य प्राप्त कर चूका हूँ .....हम भी दिल्ली दरबार मेंसूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया जी की दरगाह पर माथा टेकने गए थे ..... लेकिन क्यों गए थे यह इतने सालो के बाद आज आपका लेख पढ़ कर मालूम हुआ ...... सच में ही बच्चों को भगवान का रूप और मन के सच्चे कहा गया है ..... भ्रमर जी की बिटिया के बाद आपकी बिटिया की मासूमियत को जाने का अवसर भी आज मिल ही गया ..... आप सभी के लिए सपरिवार मंगलकामनाए औए शुभकामनाये मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा:

के द्वारा:

आदरणीय अब्दुल रशीद भाई , सादर अभिवादन ! आयुर्वेद हमारी प्राचीनतम चिकित्सापद्धति है , इस पर संदेह नहीं परन्तु यह बिडम्बना अवश्य है कि लालचवश कुछ आयुर्वेद चिकित्सक धड़ल्ले से एलोपैथी की प्रैक्टिस कर रहे हैं | आयुर्वेद/ प्राकृतिक चिकित्सा रोग की जड़ पर कार्य करती है जबकि एलोपैथी सिर्फ रोग लक्षणों को दबाती है , परन्तु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आपातकाल एवं शल्यक्रिया के क्षेत्र में एलोपैथी ने काफी उन्नति की है | रक्तचाप बढ़ने का एक प्रमुख कारण है रक्त में कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराईड की मात्रा बढ़ना | भोजन में नमक व् तेल, घी की मात्रा कम करने से एवं प्रातः खाली पेट लहसुन की दो-तीन कली पानी के साथ निगलने से कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराईड की मात्रा नियंत्रित हो जाती है |

के द्वारा: naturecure naturecure

आदरणीय रशीद भाई साहब नमस्कार, दीपावली अभी कुछ दिन ही बची है आप अभी से फुल्झादियाँ छोड़ने लगे हैं पहले तो भाई साहब आपको आने वाली दीपावली शुभ हो सर्व प्रथम लक्ष्मी आपके द्वार आये फिर आप जब हमारा पत्ता बताएं तो हम भी माता लक्ष्मी के दर्शन लाभ ले सकें. जहां तक नेताओं के कार्यक्रम में जनता या पत्रकार बुलाये जाते हैं उनमे से कई ऐसे होते हैं जो अडवांस रकम मिले बिना आते ही नहीं हैं. अधिक विस्तार में तो नहीं जाउंगा.और जनता के बारे में तो सभी जानते हैं की भीड़ दिखाने के लिए पैसे,खाना और आना-जाना साड़ी व्यवस्था करनी पड़ती है.किन्तु आडवाणी ही की सभा में ये सरेआम कैसे हुआ ये बात समझ नहीं आयी वरना तो ये शायाद रीत बन गयी है.वैसे आज मै भी भोपाल में अपने संगठन की रैली में शामिल हो कर आया हूँ किन्तु भाई साहब वहां ऐसा कुछ नहीं था. फिर भी यही कहूंगा की निंदनीय कार्य है मगर नेताजी का फोटो ना छपे तो उनका तो सारा धंधा ही चौपट हो जाएगा. आपने कश्मीर का भी जिक्र किया है.अवश्य ही प्रशांत जी को माफ़ी मांगना ही चाहिए.उनकी अन्य बातों पर भले ऐतराज कम हो किन्तु देश के विखंडन का प्रस्ताव दिल को चीरने वाला ही लगता है.किन्तु अब हकीकत को भी समझें तो इसके पीछे हमारी सरकारों की ढुलमुल निति ही काफी जिम्मेदार है प्रशांत जी को सिर्फ दोष देना ठीक नहीं है. क्योंकि वहां की जनता कब तक सहेगी? कब तक सेना वहां गृहयुद्ध लड़ेगी? आखिर कोई तो हल निकलना ही चाहिए की नहीं?इसलिए बार बार विचार करना चाहिए की गलत कौन है. साधुवाद.

के द्वारा: akraktale akraktale

प्रिय राशिद भाईजान ..... आदाब ! भाई साहिब ! दिवाली बस अब आधा कदम ही दूर रह गई है ..... अडवानी जी के बाद दूसरे नेताओं से भी लेने का पत्रकारों का हक बनता है .... वैसे मेरा मानना है कि मांगने कि नोबत ही क्यों आये बिना मांगे ही इनको इनका बनता हक प्रदान कर दिया जाना चाहिए ..... ************************************************************************************* आपसे एक प्रार्थना है कि आप अपने लेख में बिलकुल मेरी तरह कि ही गलती कर गए है किरपा करके उसको सुधार ले .... जयचन्द वाली लाइन को ..... यहाँ पर ज्यादातर ब्लागरों कि मंशा साफ़ और नीयत साफ़ ही होती है ..... बस लिखने वाले का अपने भाव मे+बहाव में +रवानी में लिखना और पढ़ने वाले का अपने नजरिये से पढ़ना ही कुछेक अंतर तथा भर्म पैदा करता है -जो कि वास्तव में होता नहीं बस दिखाई देता है -आभास होता है -लेकिन फिर भी यह सब होकर भी नहीं होता ..... आज काफी दिनों के बाद आपकी पोस्ट पड़ कर बहुत अच्छा लगा आज आपके घर पर आकर मिलने का मौका मिला वर्ना तो ज्यादातर बार +समय आपको ही हमारे घर पर आने का कष्ट उठाना पड़ता है ..... हार्दिक आभार सहित मुबारकबाद आपको भी सपरिवार दीपावली कि बधाई

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा:

अण्णा सरकार आती रही,सरकार जाती रही कभी इस दल की,कभी उस दल की कही बहूमत मे, कही अल्पमत मे तो कही मीली जूली १९४७ से आज २०११ हो गया आजादी का मतलब ही जैसै सरकार हो गया एक्साइज ड्यूटी,सेल टेक्स,स़र्वीस टेक्स,टोल टेक्स,कस्टम ड्यूटी,इनक्म टेक्स,आक्ट़ाई है सरकार की कमाई जनता ने जुटाई हाड़ तोड़ मेहनत कर,पेटकाट कर,पसीना बहा कर बदले मे मिला क्या टूटी फूटी सड़के,सड़को पे रिसता सीवर का पानी,स्कूल बिना शिक्षक के शिक्षा पूजीवाद की गूलामी मे,बिना डा्क्टर के स्वास्थ केन्द़,डा्क्टर मिले दवा नही,दवा मीली तो नकली, पानी का आभाव,बिना बिजली का गाँव आतंक,नकस्लवाद और बेरोजगारी की धूप भ़ष्टाचार की छाव और मंत्रियो,अफसरो का बढ़ता बैलेन्स स्विस बैंक मे दफ्तरो के दर दर की ठोकर सरकार मदारी जनता जोकर छल, कपट,भाषणो का जाल क्षूठे वादो की चाल जाति मजहब की फूट,बेरम बेशर्म सफेदपोश लूट हरऐक नेक कदम पर नियत की खोट दी है दिल के अन्दर बहूत अन्दर तक चोट "नही,नही,नही,अब ये व्यवस्था,अब ये तन्त्र और हमे मंजूर नही करनी है सम्पूण॑ करान्ती बदलनी है हर व्यवस्था" यही कसम खाई है हाँ,हाँ ,हाँ ,ये आजादी की दूसरी लड़ाई है!

के द्वारा:

राशिद भाई आम जनता की नज़र से मत देखिए नेताजी के नज़र से देखें आपको चारो तरफ आम जनता के गाढ़ी कमाई के पैसे से किया गया विकास नज़र आएगा | कुछ उदहारण पेश कर रहा हूँ | १. लखनऊ जाकर देखिए दलितों के लिएय पार्क बना है जो कई बार तोड़ा और बनाया गया क्योंकि कला की उच्चतम समझ रखने वाली बहनजी को पसंद नहीं आ रहा था | भले ही दलित बेचारा पार्ट के पास नहीं फाटक सकता है | लेकिन उसके बच्चों के खेलने के लिए पार्क है | भले ही उसके पास काम नहीं है, खाने को नहीं है बदन पर कपडे नहीं है, उसको इलाज़ के लिए दर - दर ठोकरे खानी पड़ती हो लेकिन पार्क तो है न | यह बहनजी का सपना है की दलित के बाल गोपाल पार्क में खेलें भले ही बीमार और खाली पेट हों | २. इन पार्कों में रात भर हजारों वाट की लाइट जलती रहती है, यह भी दलितों के लिए ही है | पुरे प्रदेश में बिजली की हाहाकार मची है लेकिन पार्क रोशन है | Reliance वालों को पॉवर स्टेशन इसलिए नहीं बनाने दिया गया क्योंकि वह सपा के समर्थक है | जनता बिना बिजली के बिलबिलाए उनका घर तो दमकता रहता है न | ३. पहले राजाओं के यहाँ पर हाथी होते थे उनके रुतबे के प्रतीक, लेकिन अब न रजा रहे न राजवाडा रहा हाथिओं की कौन देखभाल करेगा | इसीलिए बहिन जी ने पथ्थर के हजारों हाथी बनवा दी | इसके कई फाएदे है, जैसे आप अगर बेरोजगार है तो हाथी बेचिए और पैसा पाईए | कितना विकास हुआ है, किसी ने ऐसी सोचने की जुर्रत की थी | ४. मरने के बाद महान लोगों की मुर्तिया लगे जाती है | कल किसने देखा है, खुद को महान बना डाला बहनजी ने , किसी ने पहले सोचा था | यह सब विकास नहीं तो क्या है | आप हम टैक्स दें और उस पैसे से ऐसा विकास हो रहा है | ५. सपा बसपा और साड़ी पार्टियाँ गरीबों में पैसे बांटती है | यह पैसा कहाँ से आता और आएगा | पैसा देकर विकास कर रहे हैं | ६. कानपुर आकर देखिए आप चाँद का आनंद उठा सकेंगे सडकों के नाम पर खाली गड्ढे है |आप कब कहाँ अपने को पातळ लोक में पाएंगे आप को खुद पता नहीं | बताइए मुफ्त में पातळकी सैर करा रहें है और एक आप है कह रहे है की विकास नहीं हो रहा है | ७. भला हो शेर - शाह - शुरी का जिसने ४०० साल पहले जीटी रोड बनवा दिया था लेकिन जितना चौड़ा वोह ४०० साल पहले था आज भी उतना ही है | हाँ दोनों तरफ कीचड, गन्दगी, टेम्पो स्टैंड, बस स्टैंड, लोगों के खड़े होने का स्थान बन चुका है | और तो और एक रेलवे लाइन भी इस रोड के साथ - साथ चलती है | ३९ crossing है जब ट्रेन गुजरती है तो इन crossings पर आप को कई सौ लोगों का झुण्ड मिलेगा सब इस होड़ में की कौन पहले निकलेगा बताइए इस बहाने लोग आपस में मिल जुल लेते है, पारिवारिक सब्दावालियो का प्रयोग कर एक दुसरे से बात कर लेते है और उनमे एक competition की भावना जागृत होती है, तथा कभी - कभी हाथापाई भी देखने को मिलता है | हो सकता है ऐसे ही कोई Olympic के लिए चयनित कर लिया जाए | चरों तरफ विकास ही विकास नज़र आता है | ८. जिनके माँ बाप भीक मांग कर खाते थे उनके पास आज करोड़ों की जायदाद है | यह अपना विकास ही तो है | ९. कोई नया उद्योग नहीं है, जितने थे वोह अनेक कारणों से बंद कर दीए गए है , कोई बात नहीं अपना बिज़नस करें जैसे चोरी, डकैती, राहजनी कितने अच्छे बिज़नस है इसमें कोई skill , education मूलधन की आवसक्यता नहीं है | धंधा कितना फलफूल रहा है | यह सब विकास ही विकास ही है | १०. अभी बसपा है अगर सपा, कांग्रेस, भाजपा आएगी तब भी यही होगा थोडा इधर थोडा उधर नेताजी चुनाव के समय आप को गिना देंगे की पहले सारकार के समय ५००० क्राईम हुई थी और हमारे सारकार में ४९९५ हुई है तो क़ानून वाव्स्था सुधरा की नहीं | महंगाई तो केंद्र सरकार की देन है प्रदेश सरकार क्या करेगी | कई लाख करोड़ मांगे गे थे केंद्र से अपने विकास के लिए नहीं मिला इसीलिए कुछ नहीं हो सका | आप एक और मौका दें (लूटपाट करने का ) हम इस बार विकास ही विकास कर देंगे | major वोट बैंक गरीब तबका है जो थोड़े पैसे पाकर खुश हो जाता है और अपने मुखिया के कहने पर वोट डालता है | शिक्षा के नाम पर घोटाला ही घोटाला है, बी. एड.नक़ल कर लोग पास होते है में घूस देकर प्रवेश लेते है टार्गेट होता है गाँव में टीचर बननेका २२००० रूपए वेतन पाने के लिए | एक बार अगर टीचर बन गाए तो खुद घर में बैठकर २०००० रूपए कमाते है और स्कूल में कोई चरवाह बच्चों को २००० रूपए में हांक रहा होता है, सब खुश की सबको कितनी अच्छी शिक्षा मिल रही है | मिड डे माल में सदी हुई खिचड़ी खिलाई जाती है | जिसको खाने को नहीं मिलता उस गरीब के लिए एक वक़्त की सड़ी और कीड़े मकौड़े भरे खिचड़ी ही अमृत सामान है | नेताजी तो सस्ते में बिरयानी, चिकेन खाते है और सोचते है सब येही खा रहे होंगे. और देश तो विकास की पथ पर अग्रसर है | जब तक भ्रष्टाचार को जड़ से नहीं मिटाया जाएगा, मतलब इन लुटेरों को गद्दी से उखाड़ फेंका नहीं जाएगा हम आप ऐसे ही कुढ़ - कुढ़ कर जीएंगे | वन्दे मातरम

के द्वारा: mdhamdheray mdhamdheray

के द्वारा:




latest from jagran