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मेरे हिम्मत को सराहो मेरे हमराह चलो, मैंने एक दीप जलाया है हवाओं के खिलाफ.

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मकई का दाना

Posted On: 11 Dec, 2011 Others में

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आदरणीय मित्रो यह शब्द कोई अनजान शब्द नहीं यह वही मकई है जिसके बारे में कहावत प्रसिद्ध है “सरसों कि साग मक्के की रोटी” आज मैं मकई के जन्मदाता किसान के विषय में कुछ बात करना चाहता हूँ। जिस प्रकार आज मकई के दो प्रकार के बीज बाजार में उपलब्ध हैं एक देशी तो दुसरा…………। ठीक उसी प्रकार आज हमारे देश में दो प्रकार के किसान हैं एक देशी जिसकी हालत दिन_प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है वहीँ, दुसरे दिखावे के किसान जिनका हाल में दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की हो रहा है, तो क्या दिखावे को ही सच मान लिया जाए?
मकई का दाना और दिखावे का किसान
दिखावे के पास रखा मकई का दाना बडे सलीके से सम्भाल कर रखा हुआ देखने में बेहद आकर्षक लगता है। यहां मकई के दाने के लिए रख रखाव की पुरी व्यवस्था है लेकिन उसका अन्त क्या होगा या तो वह रखे रखे सड़ जाएगा या भोजन के रुप में किसान का खुराक बन जाएगा। परिणाम शून्य।
मकई का दाना और देशी किसान
देशी किसान मकई के दाने को जमीन जोतकर मिट्टी में दबा देगा जहाँ दाने को शायद शुरुआत में बेहद तकलीफ होगी क्योंकि एक तो वह मिट्टी से दबा है दुसरा धूप की गर्मी या यूँ कहे वातावरण के हर परिस्थिति को भोगना उसका नसीब है, अन्त में बेहतर कल के लिए वह अपना अस्तित्व त्याग देता है। परिणामस्वरूप वह एक सुन्दर पौधे को जन्म देता है,अबोध पौधे को देखकर किसान उसकी देखभाल बहुत ही प्यार से करने लगता है क्योंकि उसमें उसका सुनहरा भविष्य दिखने लगता है एक तो पौधे की हरियाली धरती माँ का श्रंगार कर सुन्दर बनाने में योगदान देती है तो दुसरी ओर उसके फल उस जैसे सैंकड़ो स्वरुप को जन्म देंगे। जिससे किसान का पेट भी भरेगा और उसका वंश भी आगे बढेगा।
इस देश में भी दो प्रकार के किसान रुपी नेता हैं जो मकई रुपी जनता को अपने अपने अन्दाज में अपनी खासियत बता रहे हैं । एक के पास है मायावी शक्ति जहाँ सब कुछ है लेकिन अन्त शून्य।
और दुसरे के पास है सच जो जरा कड़वी और तकलीफ दायक लेकिन अन्त सुनहरा।
अब आप से विनम्र निवेदन है आप बताए आपको कैसा नेता चाहिए?

दिल से
पर्वत में शिवालय तो नदी में देवी दिखता है
यह वह देश है जिस देश में मां की छवि दिखता है
ये माना सब कुछ आज ठीक नही “राशिद”
मुझे तो अन्धेरे के बाद का सुनहरा रवि दिखता है

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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

December 15, 2011

रशीद जी कम शब्दों में भी आपने प्रभावशाली तरीके से बेहतर सन्देश दिया है| आपको हार्दिक शुभकामनाएं|

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 15, 2011

    आप अपने कीमती वक्त से वक्त निकाल कर प्रतिक्रिया देकर हमारा हौंशाला बढाया इसके लिए हम आपके शुक्रगुजार है

December 14, 2011

रशीद भाई नमस्कार ! बिलकुल यथार्थ कहा है आपने “ठीक उसी प्रकार आज हमारे देश में दो प्रकार के किसान हैं एक देशी जिसकी हालत दिन_प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है वहीँ, दुसरे दिखावे के किसान जिनका हाल में दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की हो रहा है,” पता नहीं इस देश के वास्तविक किसान कब अपना हक़ पाएंगे और नकली किसानों का पर्दाफाश होगा… बहुत उम्दा बधाई !!

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय डॉ,सूर्या जी आपके स्नेह और प्रेणादायक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

akraktale के द्वारा
December 13, 2011

राशिद भाई नमस्कार, स्वस्थ रहने के लिए कडवी दवाई तो पीनी ही होगी.छोटी कहानी बड़ी सोच. धन्यवाद.

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    सच कहा आपने स्नेह ke लिए शुक्रगुजार है हम

Santosh Kumar के द्वारा
December 13, 2011

मित्र ,..बहुत बढ़िया पोस्ट ..दिखावे से तो बचना ही होगा … .बीमारी में अच्छे स्वस्थ्य के लिए कडवी दवाई पीनी ही पड़ती है ,… ये माना सब कुछ आज ठीक नही “राशिद” मुझे तो अन्धेरे के बाद का सुनहरा रवि दिखता है…..हार्दिक आभार आपका

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    मित्र आपका दवा(प्रतिक्रिया) कडवा है पर असरदार है स्नेह के लिए शुक्रगुजार है हम

bharodiya के द्वारा
December 13, 2011

डिमांड डिमान्ड की बात है, अब्दुल रशिदभाई । डिमान्ड तो यही होनी चाहीए । असली घी असली तेल नर और नारी भी असली हवा और पानी भी असली फीर नेता क्यों हो नकली

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    अशली प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

Amar Singh के द्वारा
December 12, 2011

सुन्दर विचार

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रतिक्रिया व स्नेह के लिए शुक्रगुजार है हम

manoranjanthakur के द्वारा
December 12, 2011

बहुत ही अलग सच को प्रतिबिम्बित करती सुंदर रचना

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

alkargupta1 के द्वारा
December 12, 2011

राशिद जी , गहन भाव लिए हुए अति उत्तम आलेख ……सत्यता तो यही है

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय अलका जी स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

Rajkamal Sharma के द्वारा
December 12, 2011

प्रिय रशीद भाईजान ….. नमस्कारम यह बहुत ही अच्छी बात है कि दूसरों के विपरीत आप घोर आशावान है मैं तो भगवान से यही प्रार्थना करना चाहूँगा कि आपकी आशाओ रूपी पेडों पर भरपूर फसल लहलहाए और इस देश तथा जनता के सुनहरे दिन फिर से वापिस लौट कर आ जाए हा हा हा हा हा हा हा ताली बजाकर बधाई नहीं नहीं मुबारकबाद हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    naturecure के द्वारा
    December 12, 2011

    बिलकुल ठीक !

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    बड़े भाई जान आप आपकी अदा की क्या मिशाल आपका मार्गदर्शन हमारे लिए अनमोल है प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    डॉ.कैलाश जी स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

Amita Srivastava के द्वारा
December 12, 2011

राशिद जी छोटी सी कहानी मे सारा सच बयाँ कर दिया . अच्छी रचना

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    अमिता जी आपका हार्दिक स्वागत है प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
December 12, 2011

प्रिय रशीद भाई अच्छा समझाया आप ने ..सुन्दर प्रश्न काश लोग इसका संजीदगी से उत्तर तलाश लें … मुझे तो अन्धेरे के बाद का सुनहरा रवि दिखता है……….दिखना भी चाहिए आइये आशावान रहें …. दुसरे के पास है सच जो जरा कड़वी और तकलीफ दायक लेकिन अन्त सुनहरा।…आइये अभी तकलीफ सह लें … भ्रमर ५

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    स्नेह के लिए शुक्रगुजार है हम

shashibhushan1959 के द्वारा
December 12, 2011

मान्यवर रशीद जी, सादर. “बहुत चुटीली बात चार शब्दों में कह दी, भारत मान के सच्चे लाल आप “राशिद जी” अगर नहीं कुछ ठीक आज है, तो कल होगा, सबके मन विश्वास यही तो है राशिद जी.”" . विश्वास के साथ की गई आशा अवश्य पूर्ण होती है, भले कुछ देर हो. धन्यवाद !

    shashibhushan1959 के द्वारा
    December 12, 2011

    भारत मान के सच्चे लाल आप “राशिद जी” के बदले “भारत माँ के सच्चे लाल आप “राशिद जी”” पढ़ें !!

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    शशि जी आपने तो हम जैसे नाचीज को भी आपने खाश अंदाज से कुछ करने का हौंशाला बढ़ा दिया स्नेह के लिए शुक्रगुजार है हम

allrounder के द्वारा
December 12, 2011

नमस्कार राशिद जी , बहुत ही कम शब्दों मैं बेहद गहराई भरी बातें है आपके आलेख मैं, उत्तम आलेख पर हार्दिक बधाई आपको !

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    आपका हार्दिक स्वागत है आपकी स्नेहपूर्वक दी गई प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

abodhbaalak के द्वारा
December 12, 2011

अब्दुल राशिद भाई बहुत गहरी बात, अँधेरे तो है पर रौशनी की आस नहीं छोड़ी …………… खूबसूरत रचना, आप के लेख दिन ba दिन ………….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    मित्र कोई खता गर हो गई है तो भूलकर अपने अनुज का मार्गदर्शन कराते रहिए ऐसा मेरा अनुरोध है आपके स्नेह के लिए शुक्रगुजार है हम

jlsingh के द्वारा
December 11, 2011

मुझे तो अन्धेरे के बाद का सुनहरा रवि दिखता है!!!!!! बहुत ही सुन्दर चित्रण और निरूपण रशीद भाई! आपने इतने सुन्दर ढंग से एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण विषय को एक अनूठे अंदाज में रक्खा कि मेरा मन मेरे पिताजी के खेत में विचरण करने चला गया. मेरे पिताजी जैसे अनेकों किसान के “हम सभी”(आम आदमी) बड़ी मिहनत और प्यार से सम्हाले(पाले) गए हरियाली युक्त संतान हैं, जिनमे भविष्य की संभावनाएं हैं…… रशीद भाई, मेरे ख्याल से आपकी यह रचना असीम संभावनाओं की रक्त बीज है, जिसे हर पाठक सर आँखों पर लेगा. मेरी हार्दिक शुभकामना और बधाई!

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    जवाहर जी आपको खेत की याद आगई मेरा लिखना सफल हुआ आपका स्नेह और आशीर्वाद की आवश्यकता हमें हमेशा रहता है आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

minujha के द्वारा
December 11, 2011

राशिद जी नमस्कार निसंदेह सोचने को विवश करती रचना बहुत अच्छा प्रश्न

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    मीनू जी आपके स्नेह के शुक्रगुजार है हम

nishamittal के द्वारा
December 11, 2011

गहन विचारों से समृद्ध आलेख राशिद जी.पर्वत में शिवालय तो नदी में देवी दिखता है यह वह देश है जिस देश में मां की छवि दिखता है ये माना सब कुछ आज ठीक नही “राशिद” मुझे तो अन्धेरे के बाद का सुनहरा रवि दिखता है आशावादी पंक्तियाँ

    Abdul Rashid के द्वारा
    December 14, 2011

    आदरणीय निशा जी आपका आशीष बना रहे ऐसी हमारी कमाना है


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