आवाज़-ए-हिन्द

मेरे हिम्मत को सराहो मेरे हमराह चलो, मैंने एक दीप जलाया है हवाओं के खिलाफ.

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अतिथि देवो भव:

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अतिथि देवो भव: की परम्परा कब तलक निभाएंगे
जख्मों की टीस को सहकर कब तलक मुस्कुरायेंगे
हाथ मिलाने से क्या जब दिलों में मुहब्बत तंग हो
दहशत से अमन का रिश्ता कब तलक निभाएंगे
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एक धमाका और हर तरफ पसरा सन्नाटा
बुझ गया चिराग टुकड़ों में मिला निशां
इंसानी टुकड़े को चिता दूँ या करुं दफन
मजहब के नाम पर बट नहीं सकता इमां
सियासत के लोग क्या जाने दिलों का टूटना
बर्बाद आशियाने को यूं कब तलक बनाएँगे
अतिथि देवो भव: ……… कब तलक मुस्कुरायेंगे
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मुहब्बत सरहदों की मोहताज नहीं यकीनन
लेकिन मुहब्बत से बड़ी है हिफाजत वतन का
कैसे बिठाए सर आंखों पर उस बातिल को
जिसकी पनाह में महफूज है सौदागर अमन का
हवाओं के खिलाफ चलना आसान नहीं “राशीद”
कायरों की तरह आंख यूं कब तलक झुकायेंगे
अतिथि देवो भव: ……… कब तलक मुस्कुरायेंगे

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
April 12, 2012

राशिद साहब नमस्कार, अतिथि देवो भव: की परम्परा कब तलक निभाएंगे जख्मों की टीस को सहकर कब तलक मुस्कुरायेंगे हाथ मिलाने से क्या जब दिलों में मुहब्बत तंग हो दहशत से अमन का रिश्ता कब तलक निभाएंगे आपकी वाणी और कल समाचार सुना कसाब पर अब तक ६ करोड़ २२ लाख खर्च कर चुकी है सरकार. सुन्दर काव्य रचना और सुन्दर मन के भाव. आभार.

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 12, 2012

    आदरणीय अशोक जी नमस्कार स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम सप्रेम अब्दुल रशीद

yogi sarswat के द्वारा
April 11, 2012

आदरणीय श्री राशिद जी सादर नमस्कार ! मुहब्बत सरहदों की मोहताज नहीं यकीनन लेकिन मुहब्बत से बड़ी है हिफाजत वतन का कैसे बिठाए सर आंखों पर उस बातिल को जिसकी पनाह में महफूज है सौदागर अमन का हवाओं के खिलाफ चलना आसान नहीं “राशीद” कायरों की तरह आंख यूं कब तलक झुकायेंगे अतिथि देवो भव: ……… कब तलक मुस्कुरायेंगे अगर मैं सही पकड़ पा रहा हूँ तो ये पंक्तियाँ ज़रदारी ( माफ़ करें मैं उसे ज़रदारी साब नहीं लिख सकता )के भारत भ्रमण के बाद लिखी हैं आपने ! क्यूंकि इन पंक्तियों में जो सच्चाई बयां करी है आपने , जो एक हिन्दुस्तानी के दिल की आवाज़ दी है वो हकीकत है ! कृपया बातिल का अर्थ बताएं !

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    भाई योगी जी आपका प्यार और हठ है की मै दुबारा जे जे पर आया हूँ. लेख पसंद अया इसके लिए तहेदिल से शुक्रगुजार है हम. आपने जो समझा इस लेख का अर्थ वह सही है. बातिल का मतलब होता है झुठा

abodhbaalak के द्वारा
April 11, 2012

रशीद भाई बहुत से लोगो की दिली भावनाओं को आपने शब्द दे दिए हैं. बहुत खूबसूरत, ऐसे ही लिखते रहें (वैसे मेरा नाम तो याद है न, बहतु दिन के बाद आपके पोस्ट पर …………….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    अबोध जी आपको भूल जाना नामुमकिन है. आपने तो पपीहे से पुछ लिया के सावन कि बूंद भूल गए हों क्योकि साल भर प्यासा रहकर सावन की एक बूंद ही उसकी प्यास बुझा सकता है. आपने तो मुझे उस वक्त सराहा है जब मुझे कोई जानता भी ना था. आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुमूल्य है. यह तो योगी जी का हठ था की मै दुबारा लौट आया जे जे पर. दरअसल काम की मसरुफीयत और जिंदगी के जद्दोजहद में कुछ इस तरह उलझ गाया हूँ की अपने दोस्तों के लिए दिल में चाहत होते हुए भी समय नही निकाल पा रहा था . योगी जी का हठ और एक आर्टीकल कि कुछ लाइन ने मुझे झंकझोर दिया लाइन कुछ ऐसी थी- मुहब्बत और दोस्ती में इतना फर्क है “मुहब्बत कहता है मै तेरे बिन जी नहीं सकता और दोस्त कहता है पगले मै तुझे मरने नही दुंगा” सो हम लौट आए अपने दोस्तों की महफिल में.

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 10, 2012

मुहब्बत सरहदों की मोहताज नहीं यकीनन लेकिन मुहब्बत से बड़ी है हिफाजत वतन का कैसे बिठाए सर आंखों पर उस बातिल को जिसकी पनाह में महफूज है सौदागर अमन का भाव-पूर्ण अभियक्ति.

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय अजय जी नमस्कार स्नेह और प्रतिक्रिया ही हमे प्रेणा देता है कुछ लिखने की आपके स्नेह का हमे सदैव इंतजार रहेगा

alkargupta1 के द्वारा
April 10, 2012

राशिद जी , राष्ट्र के प्रति अनुत्तरित प्रश्न जिनके जवाब इनके पास हैं ही नहीं…. अति भावपूर्ण रचना !

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय अलका जी नमस्कार स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

चन्दन राय के द्वारा
April 10, 2012

अब्दुल रशीद मियाँ , बहुत ही सुंदर प्रश्नात्मक कविता , देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत आपकी रचना को मेरा सलाम

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय चंदन जी नमस्कार सलाम का जवाब देना वाज़िब होता है यानि जरूरी तो सबसे पहले आपको वालैकुमअस्सलाम आपका हमारे ब्लाग स्वागत है आपकी प्रतिक्रिया की हमे बेहद जरूरी है . अपका स्नेह मिलता रहेगा ऐसी हम उम्मीद करते हैं

shashibhushan1959 के द्वारा
April 10, 2012

आदरणीय राशिद भाई, सादर ! आपके विचार पढ़कर मैं इतना भावुक हो गया कि कुछ कह / लिख नहीं सकता ! बस आपको मेरा ह्रदय से नमन, शत-शत वंदन !

    shashibhushan1959 के द्वारा
    April 10, 2012

    आपकी यह आवाज वास्तविक आवाज-ए-हिंद है ! जो इन चोरों को नहीं समझ में आती है !

    Santosh Kumar के द्वारा
    April 10, 2012

    बहुत सुन्दर और सार्थक रचना मित्र ,..बहुत बधाई

    अब्दुल रशीद के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय शशीभूषण जी नमस्कार आप लोगो का प्यार और आशीर्वाद का परिणाम है की मै कुछ लिख पाता हूँ आपका स्नेह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण और मित्र संतोष आपका भी आभारी हूँ के व्यस्त होने के बाद भी आपने हमारे लिए दो शब्द कहें

April 10, 2012

समयानुकूल रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा. राजनीति के चूल्हे में न जाने और कितनी जिंदगियां सिकनी अभी बाकी हैं.. सादर बधाई.

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    टिम्सी मेहता जी सादर नमस्कार स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

jlsingh के द्वारा
April 9, 2012

वाह राशिद भाई वाह….आपने तो झझकोर कर रख दिया…. आपके देशभक्ति के जज्बे को सलाम….. मैं भी कल का लिखा हुआ सपना की कुछ पक्तियां आपके सामने रख रहा हूँ. “जरदारी बन गए मुरारी, राधा हिना रब्बानी खर. सीमा पर हो गयी अमन, कश्मीरी को नहीं है डर.”

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय जवाहर जी नमस्कार स्नेह और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है हम

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 9, 2012

प्रिय अब्दुल राशीद जी …… सप्रेम नमस्कारम ! आपसे तो ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी मुझको लेकिन आज आपने उम्मीद से कई गुणा ज्यादा सराहनीय और अनुकरणीय काम किया है बोलो मेरे संग – जय हिंद ! जय हिंद !! जय हिंद !!! भारत माता कि जय :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    बड़े भाई आपको कहाँ कमी लगता है मुझे नहीं मालूम लेकिन यह सब आपके मार्गदर्शन और स्नेह का परिणाम है वरना इस नाचीज के पास इतना हुनर कहाँ था. आपके प्रतिक्रिया से ही हम कुछ बेहतर लिखने में सफल हो पते है. आपका स्नेह हमारे लिए बहुमूल्य है आपका अनुज

rekhafbd के द्वारा
April 9, 2012

रशीद जी ,देश प्रेम से ओत प्रोत है आपकी यह रचना ,”मुहब्बत सरहदों की मोहताज नहीं यकीनन ,लेकिन मुहब्बत से …….|बढ़िया

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय रेखा जी नमस्कार आपका स्नेह और मार्गदर्शन की जरुरत हमेशा रहेगा आपके प्रतिक्रिया के लिए शुक्रगुजार है

dineshaastik के द्वारा
April 9, 2012

वाह राशिद भाई वाह….आपने तो झझकोर कर रख  दिया…. आपके देशभक्ति के जज्बे को सलाम…..

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय दिनेश जी नमस्कार आपके अनमोल शब्द ने आपका कर्जदार बना दिया आपका स्नेह बहुत जरुरी है हमारे लिए

nishamittal के द्वारा
April 9, 2012

आपकी राष्ट्र प्रेम की भावनाओं से ओतप्रोत कविता दिल को छू गई

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय निशा जी नमस्कार आप के दिल को यह रचना छू गई यह मेरे लिए नायब इनाम है

ashishgonda के द्वारा
April 9, 2012

मान्यवर अब्दुल रशीद जी! बहुत सही विचार है आपका, हमने बहुत संस्कार दिखाए अब अतिथि देवो नहीं रहे उनमे देवताओं के गुण नहीं रहे,,, और कहा भी गया है “कौमे वही जिंदा रहती हैं जिनके हाथ केवल दुआ में ही नहीं थप्पड़ में भी उठना जानते हैं.” इस सन्दर्भ में मेरा एक लेख पढ़ें—- http://ashishgonda.jagranjunction.com/ “अभी और बात चीत करेगा भारत पाक”

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय आशिस जी नमस्कार आप हमारे ब्लॉग पर आए इसके लिए शुक्रगुजार है हम आपलोगों का स्नेह बहुत जरुरी है हम जैसे अदना ब्लोगर के लिए

vikramjitsingh के द्वारा
April 9, 2012

जियो, रशीद भाई, जियो, बहुत अच्छा…… क्या खूबसूरत लिखा है, इस ‘ज़रदारी’ के स्वागत में……. हम तो यही कहेंगे: ”हम से टकरा के जाती है तो, ऐ मौज, तू जा, जा के समंदर से बता देना, के हम क्या हैं……”

    Abdul Rashid के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय विक्रम जी नमस्कार आपका स्नेह हमारे लिए बहुमूल्य है


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